हरियाणा: बेटे की चाह में हुईं 10 बेटियां, 11वीं डिलीवरी में मिला पुत्र रत्न 

  • 19 साल की शादी, 11वां बच्चा
  • जींद अस्पताल की घटना बनी चर्चा का विषय
  • सोशल मीडिया पर वायरल हुआ परिवार
  • 11वीं डिलीवरी में मां को चढ़ा खून
  • श्रमिक पिता की दलील: बेटियां भी किसी से कम नहीं

 

जींद, हरियाणा। हरियाणा के Jind जिले के एक सरकारी अस्पताल में इस सप्ताह एक 37 वर्षीय महिला ने अपने 11वें बच्चे को जन्म दिया। खास बात यह रही कि इससे पहले वह 10 बेटियों की मां है और अब परिवार में बेटे का जन्म हुआ है। यह खबर सामने आते ही न केवल सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई, बल्कि मातृ स्वास्थ्य और बेटे की चाह से जुड़ी सामाजिक सोच पर भी सवाल उठने लगे हैं।

अस्पताल में भर्ती, अगले दिन प्रसव

महिला को 3 जनवरी को जिंद के अस्पताल में भर्ती कराया गया था और 4 जनवरी को उसने एक बेटे को जन्म दिया। प्रसव के अगले ही दिन महिला को छुट्टी दे दी गई और वह फतेहाबाद जिले के अपने गांव लौट गई। डॉक्टरों के मुताबिक, यह एक सामान्य प्रसव था, लेकिन मां की हालत को स्थिर रखने के लिए तीन यूनिट खून चढ़ाना पड़ा।

पिता का बयान: ‘हम चाहते थे बेटा’

बच्चे के पिता Sanjay Kumar ने PTI से बातचीत में कहा कि वे 19 साल से शादीशुदा हैं और यह उनका 11वां बच्चा है। 38 वर्षीय संजय पेशे से एक मजदूर हैं।
उन्होंने कहा, “हम चाहते थे कि एक बेटा हो। मेरी कुछ बड़ी बेटियां भी चाहती थीं कि उनका एक भाई हो।”

संजय ने यह भी बताया कि उनकी अधिकतर बेटियां स्कूल जाती हैं और सबसे बड़ी बेटी कक्षा 12 में पढ़ रही है।

‘बेटियां भी किसी से कम नहीं’

बेटे की चाह को लेकर जब उनसे पितृसत्तात्मक सोच पर सवाल किया गया, तो संजय ने इससे इनकार किया। उन्होंने कहा, “ऐसा नहीं है कि हम बेटियों को कम समझते हैं। आज के समय में लड़कियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और अपनी काबिलियत साबित कर रही हैं।”

हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में जब उनसे 10 बेटियों के नाम पूछे गए, तो वह कुछ नाम बताते हुए लड़खड़ा गए, जिससे एक नई बहस शुरू हो गई।

डॉक्टरों की भूमिका और स्वास्थ्य चिंता

डिलीवरी कराने वाले डॉक्टर Sheoran ने बताया कि उनकी स्त्री रोग विशेषज्ञ पत्नी Dr Santosh ने पूरी निगरानी में प्रसव कराया। उन्होंने कहा, “मां की हालत को देखते हुए तीन यूनिट ब्लड देना पड़ा, लेकिन अंत में डिलीवरी सामान्य रही और स्थिति संभाल ली गई।”

लगातार 11 प्रसवों के बाद मातृ स्वास्थ्य को लेकर विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इतनी बार गर्भधारण महिला के शरीर पर गंभीर असर डाल सकता है।

हरियाणा का लिंगानुपात और सामाजिक तस्वीर

हरियाणा का लिंगानुपात लंबे समय से चर्चा में रहा है। वर्ष 2025 में राज्य का लिंगानुपात सुधरकर 923 लड़कियां प्रति 1,000 लड़के दर्ज किया गया, जो 2024 के मुकाबले 13 अंकों की बढ़ोतरी है। इसके बावजूद यह राष्ट्रीय औसत 1,020 से कम है।

यह मामला दिखाता है कि सरकारी प्रयासों के बावजूद समाज में बेटे की चाह अब भी गहराई से मौजूद है।

एक घटना, कई सवाल

जिंद की यह घटना केवल एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस सोच का आईना है, जहां बेटे की चाह में परिवार का आकार बढ़ता चला जाता है। साथ ही यह सवाल भी उठता है कि क्या जागरूकता और स्वास्थ्य सेवाएं ऐसी स्थितियों को रोकने में पर्याप्त हैं।

 

 

 

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