- अवैध कॉलोनियों पर फरीदाबाद नगर निगम की नई रणनीति,
- निर्माण शुरू होते ही रोकने की तैयारी,
- अब बिजली-सीवर-पानी कनेक्शन रोकने की तैयारी,
- सरकारी जमीन पर कब्जा कर कॉलोनी बसाना पड़ेगा महंगा,
- बिजली-पानी और सीवर कनेक्शन पर लग सकती है रोक,
- बुलडोजर चलाने से पहले ही रोकेंगे अवैध कॉलोनियां,
फरीदाबाद। सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे कर कॉलोनियां बसाने की प्रक्रिया को शुरुआती स्तर पर ही रोकने के लिए फरीदाबाद नगर निगम ने नई रणनीति तैयार की है। अब मकान या प्लॉटिंग पूरी होने के बाद बुलडोजर चलाने के बजाय निर्माण की शुरुआत में ही उसे रोकने पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए मुख्य नगर योजनाकार की ओर से नगर निगम की इंजीनियरिंग शाखा और दक्षिणी बिजली वितरण निगम के एसई को पत्र भेजा गया है। इसमें अवैध निर्माण करने वालों को बिजली, सीवर और पानी जैसी सुविधाओं के कनेक्शन नहीं देने की व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए कहा गया है।
नगर निगम का मानना है कि अवैध निर्माण के शुरुआती चरण में ही सुविधाओं की आपूर्ति रोक दी जाए तो ऐसी जगहों पर आबादी बसने की रफ्तार कम की जा सकती है। इससे बाद में बड़े स्तर पर तोड़फोड़ के लिए कर्मचारियों, मशीनरी और अन्य संसाधनों की जरूरत भी कम होगी।
सरकारी जमीन पर कब्जे रोकने की तैयारी
मुख्य नगर योजनाकार धर्मपाल सिंह के अनुसार सरकारी जमीन पर कब्जे और बिना CLU के भवन निर्माण को रोकने के लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। इसी उद्देश्य से निगम की इंजीनियरिंग शाखा और बिजली वितरण निगम को पत्र लिखा गया है।
निगम की रणनीति केवल सरकारी जमीन पर होने वाली प्लॉटिंग तक सीमित नहीं है। बिना CLU और स्वीकृत नक्शे के भवन बनाकर उनमें व्यावसायिक गतिविधियां शुरू करने वालों पर भी कार्रवाई की तैयारी है। ऐसे भवनों को बिजली कनेक्शन नहीं देने के लिए संबंधित विभाग को कहा गया है। अधिकारियों के अनुसार बिना स्वीकृति व्यावसायिक गतिविधियां चलने से सरकारी राजस्व को भी नुकसान होता है।
कनेक्शन मिलने से बढ़ता है अवैध निर्माण का दायरा
अधिकारियों के अनुसार किसी अवैध कॉलोनी में बिजली या अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हो जाने के बाद वहां रहने वाले लोगों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती जाती है। इससे कब्जे को हटाना प्रशासन के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
मुख्य नगर योजनाकार धर्मपाल सिंह का कहना है कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों को शुरुआत में ही रोकना जरूरी है। इसके लिए संबंधित विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण है। यदि अवैध निर्माण के साथ ही बिजली और अन्य सुविधाओं की उपलब्धता पर रोक रहेगी तो नई कॉलोनियों के विस्तार पर अंकुश लगाया जा सकता है।
सीवर और पानी के कनेक्शन में दस्तावेजों की जांच
नगर निगम की ओर से सीवर और पानी का कनेक्शन देते समय प्रापर्टी आइडी समेत संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाती है। अधीक्षण अभियंता ओमवीर सिंह के अनुसार अवैध कॉलोनियों में सीवर कनेक्शन नहीं दिया जाता। हालांकि कुछ स्थानों पर लोग मुख्य पानी की लाइन से चोरी-छिपे कनेक्शन जोड़ लेते हैं।
निगम अब ऐसे अवैध कनेक्शनों को रोकने के लिए निगरानी और कार्रवाई को और सख्त करने की तैयारी में है। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पानी की चोरी से एक तरफ सरकारी संसाधनों का नुकसान होता है, वहीं दूसरी ओर नियमित उपभोक्ताओं की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है।
फरीदाबाद नगर निगम के आधिकारिक विवरण के अनुसार शहरी क्षेत्र में जलापूर्ति, जल निकासी, स्वच्छता और अन्य बुनियादी नागरिक सुविधाओं का प्रबंधन स्थानीय निकाय की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। (Faridabad)
150 एकड़ से ज्यादा निगम की जमीन पर कब्जे
नगर निगम के सामने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की समस्या लंबे समय से चुनौती बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार निगम की 150 एकड़ से अधिक जमीन पर कब्जे किए गए हैं। इन कब्जों को हटाने के लिए अलग-अलग समय पर कार्रवाई की गई है।
नेहरू कॉलोनी में करीब 250 अवैध निर्माण गिराने की कार्रवाई के दौरान निगम को स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा था। बताया गया कि इन निर्माणों में रहने वाले कई लोगों ने बिजली, सीवर और पानी के कनेक्शन ले रखे थे। इससे कार्रवाई के दौरान स्थिति और जटिल हो गई।
जमाई कॉलोनी में भी अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। जुलाई 2026 में वहां 100 से अधिक अवैध निर्माण ध्वस्त किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। (Amar Ujala)
आठ महीने में 15 बार कार्रवाई
नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक आठ महीने के दौरान सरकारी जमीन और अवैध निर्माण से जुड़े मामलों में करीब 15 बार तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई। जमाई और नेहरू कॉलोनी जैसी जगहों पर कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में निर्माण हटाए गए।
अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई केवल मौजूदा कब्जों को हटाने तक सीमित नहीं है। नगर निगम अब ऐसी जगहों की पहचान और निगरानी पर भी जोर दे रहा है। जून 2026 में नगर निगम ने सरकारी विभागों की जमीनों पर बसी 66 स्लम बस्तियों और अवैध कॉलोनियों का सर्वे शुरू किया था। रिपोर्ट के अनुसार इन बस्तियों के संबंध में जमीन के स्वामित्व, कब्जे की स्थिति और वहां रहने वाले परिवारों की जानकारी जुटाई जा रही थी। (Live Hindustan)
नगर निगम की वेबसाइट पर भी फरीदाबाद के लिए स्वीकृत और अनधिकृत कॉलोनियों की अलग-अलग सूची तथा कॉलोनी संबंधी विवरण उपलब्ध हैं। (ULB Haryana)
तोड़फोड़ पर खर्च हो रहे भारी संसाधन
अवैध निर्माण हटाने के लिए निगम को केवल कर्मचारियों की तैनाती नहीं करनी पड़ती, बल्कि अर्थमूवर, वाहन, ईंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर भी खर्च होता है। पिछले माह गुरुग्राम रोड स्थित जमाई कालोनी में कार्रवाई के दौरान आठ अर्थमूवर लगाए गए थे।
निगम के वाहन शाखा के कर्मचारियों के अनुसार एक अर्थमूवर एक घंटे में करीब आठ से नौ लीटर डीजल की खपत करता है। छह घंटे चली कार्रवाई में केवल अर्थमूवर के संचालन पर 500 लीटर से अधिक डीजल खर्च होने का अनुमान है। इसके अलावा पुलिस बल, कर्मचारियों, वाहनों और अन्य मशीनरी की तैनाती का खर्च अलग है।
अधिकारियों के अनुसार एक दिन की ऐसी कार्रवाई में निगम का खर्च एक लाख रुपये से अधिक पहुंच सकता है। कई मामलों में एक ही जमीन पर दोबारा कार्रवाई करने की स्थिति भी सामने आई है। खोरी वन क्षेत्र इसका प्रमुख उदाहरण रहा है। खोरी में अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद की गई थी। 2021 में जमाई कॉलोनी में भी अरावली क्षेत्र की जमीन पर बने करीब 200 मकानों को हटाने की कार्रवाई की गई थी। (Hindustan Times)
अब शुरुआत में रोकने पर जोर
नगर निगम का नया प्रयास इसी खर्च और प्रशासनिक चुनौती को कम करने से जुड़ा है। यदि सरकारी जमीन पर प्लॉटिंग या निर्माण शुरू होते ही संबंधित विभागों के स्तर पर जानकारी साझा हो और बिजली, पानी तथा सीवर जैसी सुविधाओं की अनधिकृत उपलब्धता रोकी जाए तो बाद में बड़े अभियान की जरूरत कम हो सकती है।
अधिकारियों का जोर ऐसी व्यवस्था बनाने पर है जिसमें सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों को शुरुआत में ही यह संकेत मिल जाए कि अनधिकृत निर्माण को नागरिक सुविधाओं का आधार नहीं मिलेगा। इससे नई अवैध कॉलोनियों के विस्तार को रोकने और सरकारी जमीन को सुरक्षित रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
