साबरमती की तर्ज पर फरीदाबाद में बनेगा यमुना रिवर फ्रंट, वॉक-वे से बोटिंग तक होंगी सुविधाएं

  • FMDA की बड़ी योजना,
  • फरीदाबाद में यमुना किनारे बदलेगी तस्वीर,
  • दिल्ली-गुरुग्राम जाने की जरूरत नहीं,
  • रिवर फ्रंट में पार्क, वॉक-वे, साइकिल ट्रैक और बोटिंग स्टेशन से सजेगा यमुना किनारा,
  • फरीदाबाद में यमुना किनारे विकसित होगा नया पिकनिक स्पॉट,
  • रिवर फ्रंट के साथ प्रदूषण रोकने की भी तैयारी,
  • 90 एमएलडी के तीन CETP से गंदे पानी पर लगेगी रोक,

 

फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में यमुना का किनारा आने वाले समय में शहर के प्रमुख पर्यटन और मनोरंजन स्थलों में शामिल हो सकता है। फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) यमुना किनारे रिवर फ्रंट विकसित करने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित परियोजना में वॉक-वे, साइकिल ट्रैक, पार्क, घाट, बोटिंग स्टेशन और मनोरंजन से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने की योजना है।

चरणबद्ध तरीके से विकसित होगा रिवर फ्रंट

एफएमडीए की योजना के अनुसार यमुना किनारे प्रस्तावित रिवर फ्रंट को एक साथ विकसित करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। इसका उद्देश्य नदी किनारे ऐसे सार्वजनिक स्थान तैयार करना है, जहां लोग परिवार के साथ समय बिता सकें।

रिवर फ्रंट विकसित होने के बाद फरीदाबाद के लोगों को पिकनिक और मनोरंजन के लिए हर बार दिल्ली या गुरुग्राम जाने की जरूरत कम हो सकती है। परियोजना से स्थानीय पर्यटन गतिविधियों के साथ आसपास के कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

हालांकि, नदी किनारे विकास के साथ पर्यावरणीय पहलू को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। योजना में यमुना के डूब क्षेत्र को अतिक्रमण से बचाने, हरित क्षेत्र बढ़ाने और नदी के आसपास अनियोजित निर्माण को नियंत्रित करने पर जोर दिया जा सकता है।

यमुना में प्रदूषित पानी रोकना भी बड़ी चुनौती

रिवर फ्रंट को विकसित करने के साथ यमुना में पहुंच रहे औद्योगिक प्रदूषण को रोकना भी जरूरी होगा। इसी उद्देश्य से फरीदाबाद में तीन Common Effluent Treatment Plant यानी CETP प्रस्तावित हैं। इनकी कुल क्षमता 90 एमएलडी होगी।

योजना के तहत प्रतापगढ़ में 50 एमएलडी, मिर्जापुर में 25 एमएलडी और बादशाहपुर में 15 एमएलडी क्षमता के प्लांट प्रस्तावित हैं। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दस्तावेजों में भी इन तीनों परियोजनाओं का उल्लेख किया गया है। (HSPCB)

इनमें बादशाहपुर के 15 एमएलडी प्लांट को पहले चरण में आगे बढ़ाने की योजना है। इसके लिए नगर निगम की करीब छह एकड़ जमीन पर मौजूद पुराने STP को हटाकर नया प्लांट विकसित करने की तैयारी है। जमीन नगर निगम उपलब्ध कराएगा, जबकि परियोजना की राशि HSIIDC की ओर से खर्च किए जाने की योजना है।

प्रतापगढ़ CETP के लिए टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ी

परियोजना को लेकर हालिया गतिविधियां भी सामने आई हैं। अगस्त 2026 में प्रतापगढ़ में 50 एमएलडी क्षमता के CETP के निर्माण, औद्योगिक एफ्लुएंट के लिए अलग सीवर लाइन और पंपिंग स्टेशन से जुड़े कार्य के लिए टेंडर जारी किया गया। इससे परियोजना के अगले चरण की दिशा में प्रगति का संकेत मिलता है।

औद्योगिक पानी के उपचार से यमुना को राहत की उम्मीद

फरीदाबाद के औद्योगिक क्षेत्रों में डाइंग, केमिकल और एल्युमीनियम सहित कई उद्योग हैं। इनसे निकलने वाले दूषित पानी के उपचार के लिए पर्याप्त व्यवस्था होना जरूरी है। प्रस्तावित CETP में औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले पानी को उपचारित करने की व्यवस्था होगी।

बादशाहपुर CETP में शुरुआती स्तर पर DLF औद्योगिक क्षेत्र के पानी को पहुंचाने की योजना बताई गई है। इसके लिए आसपास के उद्योगों और उनके डिस्चार्ज का आकलन किया जा रहा है।

उपचारित पानी को दोबारा औद्योगिक इस्तेमाल में लाने की संभावना भी है। इससे आगरा नहर और यमुना में पहुंचने वाले प्रदूषित पानी को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही किसानों और भूजल पर पड़ने वाले प्रदूषण के दबाव को भी घटाने की उम्मीद है।

इस तरह फरीदाबाद का प्रस्तावित यमुना रिवर फ्रंट केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नदी संरक्षण, हरित क्षेत्र और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी योजनाओं के साथ आगे बढ़ने की संभावना है।

 

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