फरीदाबाद ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज में ‘बिना मेस सुविधा’ छात्रों पर 600 का शुल्क थोपने का विरोध

  • विद्यार्थियों के ‘नो ड्यूज’ पर बिना पेमेंट के हस्ताक्षर करने से किया इनकार  
  • छात्र परिषद ने डीन को पत्र लिखकर कड़ा विरोध जताया है  
  • बिना ‘नो डयूज’ के नहीं मिल पाएगी ‘एमबीबीएस’ की डिग्री  
  • 600 रूपये से कुल 28 महीने का अमाउंट 16800 रूपये देना होगा 
फरीदाबाद। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, फरीदाबाद में हॉस्टल में रहने वाले छात्रों और कॉलेज प्रशासन के बीच मेस शुल्क को लेकर विवाद गहरा गया है। कॉलेज के मुख्य वार्डन द्वारा जारी एक हालिया सर्कुलर के बाद छात्रों में भारी असंतोष है, जिसके खिलाफ छात्र परिषद ने अब मोर्चा खोल दिया है। लैटर के अनुसार मेस सुविधा लिए बिना भी ‘एमबीबीएस’ छात्र से प्रति महीने 600 के हिसाब से कुल 28 महीने का 16800 रूपये दिए बिना नो ड्यूज पर हस्ताक्षर नहीं होंगे, बिना नो ड्यूज के ‘एमबीबीएस’ की डिग्री नहीं मिलेगी। बिना डिग्री के ‘पीजी नीट’ के लिए आवेदन भी नहीं किया जा सकेगा। 
क्या है पूरा मामला?
कॉलेज के मुख्य वार्डन डॉ.अजय आर.नेने द्वारा जारी आधिकारिक सर्कुलर के अनुसार, हॉस्टल में रहने वाले सभी ‘एमबीबीएस’ छात्रों के लिए 600 रुपये प्रति माह का प्रशासनिक शुल्क अनिवार्य कर दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि यह शुल्क ‘स्टूडेंट्स कोऑपरेटिव मेस’ के संचालन के लिए है और इसे 01 अप्रैल 2021 से पिछली तारीख से लागू किया गया है।
हैरान करने वाली बात यह है कि सर्कुलर में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि यह शुल्क उन छात्रों को भी देना होगा जो मेस की सुविधा का लाभ नहीं उठा रहे हैं। इसके अलावा, नियमित मेस शुल्क को भी बढ़ाकर 3500 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। प्रशासन ने सख्त हिदायत दी है कि बकाया राशि 10 दिनों के भीतर जमा न करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
छात्र परिषद ने पत्र लिखकर जताई कड़ी आपत्ति
कॉलेज की छात्र परिषद ने इस निर्णय को ‘अनुचित आर्थिक बोझ’ करार दिया है। डीन को लिखे एक औपचारिक पत्र में छात्र प्रतिनिधियों में रितेश कुमार, हार्दिक मखीजा और सौरव वर्मा शामिल हैं ने तर्क दिया है कि जो छात्र अपनी इच्छा से बाहर भोजन करते हैं या मेस सुविधा का उपयोग नहीं करते, उन पर अनिवार्य रूप से ₹600 वसूलना तर्कसंगत नहीं है।
एमबीबीएस बैच-2020 के कई छात्रों ने इस पत्र पर हस्ताक्षर कर अपना विरोध दर्ज कराया है। छात्रों का कहना है कि मेस शुल्क केवल उन्हीं से लिया जाना चाहिए जो वहां भोजन करते हैं। बिना सुविधा लिए शुल्क वसूलना विद्यार्थियों और अभिभावकों पर जबरदस्ती का आर्थिक दंड देने जैसी प्रक्रिया है।
कॉलेज प्रशासन को विद्यार्थियों के हित का ध्यान रखते हुए निर्णय लेने चाहिए ताकि सभी के साथ न्याय हो सके। वार्डन द्वारा जारी सर्कुलर में मेस की छुट्टियों  को लेकर भी नए नियम बनाए गए हैं। अब मेस से लगातार 5 या उससे अधिक दिनों की छुट्टी लेने पर ही रियायत की बात कही गई है, जबकि 3 दिनों की छुट्टी को अमान्य कर दिया गया है।
वर्तमान में, छात्र परिषद ने डीन से इस मामले में हस्तक्षेप करने और ₹600 के इस अनिवार्य शुल्क को तुरंत माफ करने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, उनमें रोष व्याप्त रहेगा। ‘एमबीबीएस’ छात्रों की मांग नहीं मानी गई तो विद्यार्थी आंदोलन चलाने के लिए विवश हैं।
भारतीय मजदूर संघ हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक कुमार का कहना है कि यह मामला उनके संज्ञान में आया है। उनका कहना है यह छात्रों के साथ ना इंसाफ़ी है। एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही इस मामले को लेकर डीन से मिलकर इसका समाधान कराने का भरसक प्रयास करेंगे।
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