चीन हो खबरदारः भारत को अगले महीने मिलेगी राफेल की खेप

नई दिल्ली। देश की उत्तरी सीमा पर चीन की नीच हरकतों के बीच भारत ने जमीन से आसमान तक चाक-चौबंद कर दी है। अब खबर है कि फ्रांस ने तनाव के बीच ही मल्टीरोल फाइटर एयरक्राफ्ट राफेल की आपूर्ति शीघ्र करने के संकेत दिए हैं। राफेल के 6 फाइटर की पहली खेप जुलाई में मिल जाएगी।

China beware: India will get Rafael consignment next month

लद्दाख में मिराज, जगुआर और सुखोई फाइटर चीन का दहाड़ सुना रहे हैं, तो चीन की किसी नापाक हरकत का जवाब देने के लिए मिसाइलें भी तैनात कर दी गई हैं।

भारतीय सेना के युद्ध के तजुर्बे के मद्देनजर अभी तक सामरिक पेशबंदी चीन के लिए बहुत-बहुत काफी है।

किंतु राफेल की तैनात से भारत की फायदर में कहीं ज्यादा इजाफा हो जाएगा।

राफेल 150 किमी दूर तक का निशाना लगाने के लिए जाना जाता है।

इसमें तैनात मीटियर मिसाइलें फायर एंड फारगेट के सिद्धांत पर काम करती हैं।

चीन में कम्युनिस्टों के भ्रष्टाचार के कारण जनता में सुलग रहे आंतरिक विद्रोह, साउथ चाइना सी में दादागीरी, कोरोना वायरस के प्रसार में संदेहनजर भूमिका, डब्ल्यूएचओ द्वारा चीन की भूमिका की जांच करने, न्यू सिल्क रोड प्रोजेक्ट के लिए देशों पर नाजायज दबाव, डब्ल्यूएचओ द्वारा छोटे देशों को कर्ज देकर अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने, जापान, आस्ट्रेलिया, ताईवान, फिलीपींस और अमरीका तक को जब-तब आंख दिखाने के बाद जो माहौल बना है, उससे चीन बहुत खतरे में पड़ गया है।

इसलिए चीन उत्तरी सीमा में भारत से उलझता हुआ नजर आ रहा है। ताकि वह भारत और विश्व पर युद्ध होने का दबाव बना सके और देश में राष्ट्रीयता का भाव पैदा कर सके।

पीएम नरेंद्र मोदी ने डोकलाम की यहां पर भी गलवान घाटी की झड़प के बाद चीन को सबक सिखाने की ठानी है।

भारतीय सेनाएं पूरी ताकत से मिरर इमेज सिद्धांत पर लद्दाख से अरुणांचल तक मोर्चे पर जा डटी हैं।

चीन से संभावित युद्ध में कोई कमी न रह जाए। इसलिए भारत ने सभी आवश्यक उपाय और प्रबंध किए हैं।

इसी के मद्देनजर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रूस की विक्ट्री परेड में शामिल हुए। उन्होंने रूस की सरकार एस-400 तकनीक की अविलंब आपूर्ति पर बल दिया, जिसे रूस ने सिद्धांततः स्वीकार कर लिया है।

इसी तरह राजनाथ सिंह ने फ्रांसीसी समकक्ष फ्लोरेंस पार्ली से फोन पर वार्ता करके राफेल की यथासंभव आपूर्ति की मांग की थी।

अब संकेत मिले हैं कि फ्रांस अगले महीने तक राफेल की कुछ इकाईयों की आपूर्ति करने के लिए सहमत हो गया है।

कुछ सैन्य अधिकारियों के हवाले से मीडिया में रिपोर्टें आई हैं कि इसका पहला स्क्वाड्रन अंबाला एयरबेस पर तैनात किया जाएगा।

जहां से पाक या चीन की किसी भी बेजा हरकत का तगड़ा पलटवार किया जा सकेगा।

राफेल की खासियत

भारत ने 2016 में 36 राफेल फाइटर के लिए फ्रांस के साथ लगभग 58,000 करोड़ रुपये की लागत से एक करार किया था।

राफेल लंबी दूरी मिसाइलें दागने में समर्थ है। यह क्षमता चीन और पाकिस्तान के फाइटर्स में नहीं है।

यह सतह से हवा और हवा से हवा में वार करने में बेजोड़ है।

इसके भारत के जखीरे में शामिल होने से चीन और पाकिस्तान पर बढ़त हासिल होगी।

भारतीय पायलट पहले से राफेल का संचालन और तकनीक का प्रशिक्षण ग्रहण कर चुके हैं।

राफेल प्रति 60 हजार फुट की ऊंचाई तक पहुंच सकता है।

इसकी ईंधन क्षमता 17 हजार किलोग्राम है।

यह 60 घंटे की अतिरिक्त उड़ान भर सकता है।

2,223 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ान भर सकता है।

आकार में सुखोई से छोटा होने के चलते इसे इस्तेमाल करना आसान है।

राफेल की मारक क्षमता 3700 किलोमीटर तक है।

जबकि इसमें तैनात स्काल्प की रेंज 300 किलोमीटर है।

 

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