कमांडो तेनजिनः भारत ने चीन की बांह मरोड़ी

नई दिल्ली। स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (एसएफएफ) कमांडो नेईमा तेनजिन का लेह में आज अंतिम संस्कार किया गया। इस अंतिम संस्कार से चीन के कान खड़े हो गए हैं या यूं कहें कि भारत ने एक बार चीन की बांह मरोड़ दी है। अंतिम संस्कार में इस दौरान लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। भारत माता के जयकारों से इलाका गूंज उठा। चीन को चैंकाने वाली सबसे बड़ी यह है कि इस अवसर पर तिब्बत और भारत की एकजुटता का अनुपम वातावरण बना। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव शहीद के अंतिम संस्कार में पहुंचे। उन्होंने शहीद को श्रद्धांजलि दी।

Commando Tenzin: India twisted the arm of China

New Delhi. Special Frontier Force (SFF) commando Neima Tenzin was cremated in Leh today. This funeral has raised the ears of China, or say that India has once twisted the arm of China. During this time, people gathered at the funeral. The area resonated with the cheers of Mother India. The biggest thing to shock China is that on this occasion, a unique atmosphere was created for the solidarity of Tibet and India. Bharatiya Janata Party national general secretary Ram Madhav arrived at the funeral of the martyr. He paid tribute to the martyr.

अगस्त के अंतिम सप्ताह में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास नेईमा तेनजिन शहीद हुए थे, जिनका लेह में सैन्य सम्मान के साथ आज अंतिम संस्कार किया गया है।

तेनजिन भारत की ऐसी सेना के अंग थे, जिनमें तिब्बती लड़कों की बहुलता है।

दुनिया के किसी भी कौने में रह रहे तिब्बती का दिल तिब्बत के लिए धड़कता है।

चीन ने तिब्बत पर कब्जा कर रखा है। यह बात उन्हें हमेशा दुख देती रहती है।

तेनजिन ही नहीं, हाल ही में जब भारतीय जवान लेह से रवाना हो रहे थे, तो तिब्बतियों ने न केवल वाहनों का तिब्बती परंपराओं के अनुसार पूजा-पाठ किया, बल्कि सभी जवानों को आशीर्वाद भी दिया।

भारत ने विश्व में सर्वाधिक तिब्बतियों को शरणार्थी का दर्जा दिया हुआ है।

दशकों से तिब्बती यहां गुजर-बसर कर रहे हैं।

कई तिब्बती यहां डॉक्टर, इंजीनियर जैसे पेशेवर या बड़े व्यापारी बन चुके हैं।

तिब्बती भारत के इस योगदान के लिए सदैव मन से कृतज्ञता जताते हैं।

एलएसी में जब चीन ने आक्रामकता दिखाई, तो तिब्बती युवाओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि चीनी सेना को सबक सिखाने के लिए भारतीय सेना

उनका उपयोग करना चाहती है, तो वे इसके लिए सहर्ष सहमत हैं।

समझा जा रहा है कि चीन इस बार एलएसी पर सर्दियों में भी डेरा जमा सकता है।

इसलिए भारतीय सैनिक भी वहां डटने के लिए सर्दियों का सामान जुटा रहे हैं।

इसके लिए लेह और निकटवर्ती क्षेत्रों में बसे सैकड़ों तिब्बतियों ने कंधों पर सामान ढो-ढोकर ठिकानों तक पहुंचाया और इसके लिए उन्होंने सेना कोई पारिश्रमिक भी लेने से अस्वीकार कर दिया।

भारत ने सदैव चीन के साथ संबंधों में संयम दिखाया और तिब्बती कार्ड का उपयोग नहीं किया।

चीन पाकिस्तान, नागा विद्रोहियों, नक्सलियों और उत्तर-पूर्व के अन्य गुटों को धन, शस्त्रास्त्र और सहायता देकर विद्रोह के लिए उकसाता रहा है।

अब वह एलएसी पर भी आक्रामकता दिखा रहा है। ऐसे में प्रतीत हो रहा है कि भारत सरकार भी अब तिब्बती युवाओं के उपयोग से नहीं हिचकेगी, जो चीनी सैनिकों की कमर तोड़ने में इक्कीस सिद्ध होंगे।

तेनजिन के अंतिम संस्कार में राम माधव का पहुंचना इस दिशा में चीन को स्पष्ट संकेत है।

बता दें कि पैंगोंग के दक्षिणी इलाके में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर 29-30 अगस्त की रात चीनी सैनिकों के खिलाफ अॉपरेशन में सेना के विशेष दस्ते (विकास रेजिमेंट) के कंपनी लीडर नेईमा तेनजिन (51) शहीद हुए थे।

तेनजिन के परिवार में पत्नी और तीन बच्चे हैं।

लेह में करीब डेढ़ लाख तिब्बती शरणार्थियों की कॉलोनी है।

1971 व कारगिल युद्ध में दिखाया था शौर्य

विकास रेजिमेंट में अधिकारी थल सेना के होते हैं और जवान तिब्बती शरणार्थियों में से चुने जाते हैं। पहाड़ों पर कार्रवाई में माहिर विशेष दस्ते के जवानों ने 1971 और कारगिल युद्ध में भी अपना शौर्य दिखाया था। इसकी स्थापना 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद हुई थी।

 

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