लद्दाख में चीन के नए प्रस्ताव को भारत ने कहा कदापि नहीं

नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में एलएसी का अतिक्रमण कर अंदर घुसे हुए चीन ने फिर नई चाल चली है। चीन ने भारत को प्रस्ताव दिया है कि यदि वह फिंगर 4 इलाके से अपनी सेना को पीछे करने को तैयार हो जाता है, तो वह भी उतनी ही दूरी और मात्रा में अपने सैनिक पीछे कर लेगा। चीन के इस प्रस्ताव को भारत ने अस्वीकार कर दिया है और उससे मांग की है कि वह सीमा पर 5 मई से पहले वाली स्थिति बहाल करे।

India said no to China’s new proposal in Ladakh

New Delhi. China has moved again after entering LAC in eastern Ladakh and encroaching. China has proposed to India that if it agrees to rear its army from the Finger 4 area, it will retreat its troops in the same distance and quantity. India has rejected this Chinese proposal and demanded that it restore the position before May 5 on the border.

बता दें कि अप्रैल अंत में युद्धाभ्यास के बहाने तिब्बत क्षेत्र में पहुंची चीन की सेना ने कई जगहों पर एलएसी का उल्लंघन कर अपने ढांचे बना लिए। साथ ही उन इलाकों में सेना, टैंक, तोप, विमान और दूसरे हथियारों की तैनाती कर दी गई। उसके बाद से चीन को टक्कर देते हुए भारतीय सेना और वायु सेना भी पिछले 3 महीने से चीन के सामने एलएसी पर तैनात है।

सूत्रों के मुताबिक भारत के अडिग रूख को देखते हुए अब चीन ने भारत को प्रस्ताव दिया है कि वह पैंगोंग झील के फिंगर 4 इलाके में डिस- एंगेजमेंट के लिए तैयार है। इसके लिए भारत को भी इस इलाके से अपनी सेना और हथियार हटाने पड़ेंगे। ऐसा करने पर वह भी बराबर मात्रा में सैनिक और हथियार पीछे कर लेगा। भारत ने चीन के इस प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज करते हुए उसे फिंगर 8 के पीछे पुरानी पोजिशन पर जाने के लिए कहा है।

फिंगर 4 की ऊंची चोटियों पर हैं चीन के सैनिक

जानकारी के मुताबिक फिंगर 4 के इलाके से चीन के सैनिक अब भले ही हट गए हैं, लेकिन ऊंचाई वाली चोटियों पर अब भी उसके सैनिकों ने पोजिशन बना रखी है। फिंगर 4 से हटने के बाद चीनी सैनिकों ने फिलहाल फिंगर 5 पर पोजिशन ले रखी है। साथ ही फिंगर 5 से 8 तक के करीब 5 किमी के इलाके में भारी मात्रा में सैनिक और पहाड़ों पर इस्तेमाल होने वाले हथियार भी तैनात कर रखे हैं।

खुफिया एजेंसियों का मानना है कि चीन का इरादा पैंगोंग इलाके में पीछे हटने का नहीं है। इसलिए वह बातचीत का दिखावा करके अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत करने में लगा है। इसे देखते हुए भारतीय सेना और वायु सेना भी अपनी तैयारियों को आगे बढ़ा रही हैं। सेनाओं के दोनों अंगों ने अपने फील्ड कमांडरों को हर वक्त चौकस रहने और चीन के किसी भी दुस्साहस का करारा जवाब देने के लिए पूरी तैयारी रखने का निर्देश दिया है।

सूत्रों के मुताबिक चीन की सेना लद्दाख की भीषण ठंड में रहने का पूरा इंतजाम करके आई है। इसे देखते हुए माना जा रहा है कि अतिक्रमण का यह विवाद लंबा चलने वाला है। ऐसे में भारतीय सेना भी लद्दाख में मौजूद अपने हजारों सैनिकों और हथियारों को भीषण सर्दी से बचाने के लिए तैयारियां कर रही है।

आपसी समझौतों का उल्लंघन

भारतीय सेना के अधिकारियों के अनुसार चीन ने एलएसी पर अतिक्रमण करके 1993 और 1996 में हुए उन समझौतों का उल्लंघन किया है। इन समझौतों में कहा गया है कि दोनों देश एलएसी के प्रतिबंधित इलाकों में कोई निर्माण नहीं कर सकेंगे, लेकिन चीन लगातार इन समझौतों का उल्लंघन कर रहा है। भारत लगातार चीन के सामने इस मुद्दे को उठा रहा है लेकिन चीन समुचित जवाब नहीं दे रहा है।

भारतीय सेना ने चीन से स्पष्ट किया है कि सबसे पहले उसे दोनों देशों की सेनाओं के बीच डिस-एंगेज करना चाहिए। उसके बाद देपसांग प्लेन और दौलत बेग ओल्डी इलाके में डि-एस्लेशन प्रक्रिया पर चर्चा हो सकती है।

चीन ने खोले कई मोर्चे

सूत्रों के मुताबिक भारत को सीमा मुद्दे पर उलझाए रखने के लिए चीन ने जान-बूझकर एलएसी पर कई जगह मोर्चे खोल रखे हैं। इसी योजना के तहत उसने लद्दाख के फिंगर इलाके, गलवान घाटी, गोगरा हाइट और हॉट स्प्रिंग इलाके में सेना आगे बढ़ाई है। उसने हाल ही में भारत-नेपाल और चीन के ट्राई-जंक्शन लिपुलेख इलाके की ओर भी अपनी सेना आगे बढ़ाते हुए करीब 1 हजार सैनिक वहां तैनात किए हैं।

 

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