इस गांव में नहीं बंधती राखियां, रक्षाबंधन पर होता है मातम

गाजियाबाद। यहां के एक गांव में रक्षाबंधन बंधन नहीं मनाया जाता है। बहनें अपने भाईयों की कलाईयों पर राखिया नहीं बांधती हैं। गांव के लोग इस दिन मातम मनाते हैं। हालांकि गांव की बहुएं मायके जाकर अपने भाईयों को राखियां बांध सकती हैं।

Rakhis are not tied in this village, Raksha Bandhan is mourned, know why

Ghaziabad. Rakshabandhan Bandhan is not celebrated in a village here. The sisters do not tie the rings on the wrists of their brothers. The people of the village celebrate mourning on this day. However, the daughters-in-law of the village can go and tie the ashes to their brothers.

गाजियाबाद के मोदीनगर के पास सुराना गांव है।

यहां कई शताब्दियों से रक्षाबंधन नहीं मनाया गया है।

इस अजीब परंपरा के तार मध्यकाल से जुड़े हुए हैं।

यहां एक किवदंती प्रचलित है।

किवदंती के अनुसार यहां 12वीं सदी में कत्लेआम हुआ था।

तब मोहम्मद गौरी का आक्रमणकाल चल रहा था।

गांव के बुजुर्गों में यह आम चर्चा है कि गौरी ने इस गांव पर कई बार हमले किए, लेकिन वह विजय प्राप्त न कर सका।
इससे गौरी बहुत परेशान था।

ग्रामीणों का मानना है कि तब गांव में एक देवता थे।

जब भी गौरी आक्रमण करता था, तो वह देवता गौरी के प्रकोप से ग्रामीणों की रक्षा करते थे।

देवता के प्रभाव से गौरी के सैनिकों के सामने अंधेरा छा जाता था।

अंधता के कारण उसके सैनिकों को दिखना बंद हो जाता था।

तब ग्रामीण उन पर टूट पड़ते थे और गौरी के सैनिकों के पैर उखड़ जाते थे।

किंतु एक रक्षाबंधन पर यहां बहुत बुरा हुआ।

रक्षाबंधन सनातन धर्मी हिंदुओं का पवित्रतम त्यौहार माना जाता है।

इसलिए देवता उसदिन भोर बेला में ही गंगा स्नान के लिए प्रस्थान कर गए।

गुप्तचरों ने यह सूचना गौरी को पहुंचा दी।

गौरी ने उस दिन गांव में आक्रमण कर दिया।

गौरी के सैनिकों ने जमकर खून-खराबा किया।

गांव के सभी मर्दों यहां तक कि अबोध शिशुओं को भी एक मैदान में खड़ा किया और हाथियों से कुचलवा दिया।
जो बच गए, उनके रुंड से मुंड विच्छेद कर दिया।

एक बच्चा भी नहीं छोड़ा।

केवल बहू आपने मायके गई हुई थी। अपने भाई की कलाई पर राखी सजाने।

वह गर्भवती थी, वह जब ससुराल लौटी, तो उसके पुत्र से ही बाद में गांव का वंश चला।

इसलिए गांव के लोग तब से रक्षाबंधन नहीं मनाते हैं

लड़कियां अपने भाईयों को राखी नहीं बांधती हैं।

जबकि बहुएं मायके जाकर अपने भाईयों को राखी बांध सकती हैं।

इस दिन जब छोटे बच्चे पूछते हैं कि क्या वे रक्षाबंधन नहीं मनाएंगे, तो बड़ी-बूढ़ियां बच्चों को कहानी सुनाते हुए फफक पड़ती हैं।

वे बताती हैं कि उनके बुजुर्गों के साथ गांव में गौरी ने कितना अत्याचार किया था।

 

Related posts